बेटी हमारा आज भी, और बेटी हमारा कल भी
बेटी हमारा आज भी, और बेटी हमारा कल भी
(लेखिका: आकांक्षा सिंह “अनुभा”)
(उद्घोषिका : आकाशवाणी, रायबरेली।)
बनकर चाँदनी वो घर में आई,
ममता की छाँव साथ में लाई।
कोमल सी मुस्कान में बसी,
हर दिल की रौशनी बन गई।
पढ़ाई में आगे, हुनर में निपुण,
हर मोड़ पर दिखा वो अपनापन।
नन्हीं उँगलियों से थामे जहाँ,
बेटी ने ही बदला पूरा गगन।
जब बोझ समझा गया कहीं,
वो चुपचाप सहती रही वहीं।
पर जब मिली उड़ान की डोर,
तो बन गई ऊँचाइयों का शोर।
आज वो डॉक्टर है, इंजीनियर है,
कभी नेता, कभी टीचर है।
घर की लक्ष्मी, देश की शक्ति,
हर रूप में वो अनमोल भक्ति।
कल की आशा, आज की रौशनी,
बेटी है बदलाव की असली कहानी।
वो है जीवन का मधुर संबल,
बेटी नहीं, एक चलता उपवन जल।
तो रोकिए नहीं उसके कदम,
खोलिए उसके सपनों का आलम।
क्योंकि —
बेटी हमारा आज भी है,
और बेटी हमारा कल भी।














