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कविताएं Archives - HindiRachnakar

भारतीय डाक दशक / सीताराम चौहान पथिक

भारतीय डाक दशक  द्रुत गति का यह दौर है , द्रुत गति वाहन जाए । डाक हमारे देश की , घिसट- घिसट कर जाए ।। द्रुत – गति वाली डाक … Read More

लौटते वक़्त श्मशान से | lautate vaqt shmashaan se

लौटते वक़्त श्मशान से | lautate vaqt shmashaan se लौटते वक़्त श्मशान से लौट रहा था श्मशान से गांव के जग्गू दादा का शवदाह करके कुछ रुआंसा था क्योंकि जल … Read More

Tootee Veena – टूटी वीणा / सीताराम चौहान पथिक

Tootee Veena – टूटी वीणा / सीताराम चौहान पथिक प्रस्तुत रचना  टूटी वीणा / सीताराम चौहान पथिक द्वारा रचित दर्पण संग्रह से ली गयी है यह संग्रह १९७२ में प्रकाशित … Read More

Khaamosh- ख़ामोश/ सम्पूर्णानंद मिश्र

Khaamosh- ख़ामोश/ सम्पूर्णानंद मिश्र नमस्कार आपका हिंदीरचनाकर में आपका स्वागत है आज हम बनारस के प्रसिद्ध साहित्यकार  डॉ. सम्पूर्णानंद मिश्र  की  स्वरचित रचना  खामोश  पढ़ेंगे। जो  प्रकृति से संबंधित है  इस … Read More

अरविंद जायसवाल की कविताएं | Poems of Arvind Jaiswal

अरविंद जायसवाल की कविताएं | Poems of Arvind Jaiswal वफायें मेरी जब कभी दर्द अपने देते हैं, सारा सुख चैन छीन लेते हैं। भूख लगती न प्यास लगती है, दिल … Read More

Ghanaaksharee – घनाक्षरी / बाबा कल्पनेश

Ghanaaksharee – घनाक्षरी / बाबा कल्पनेश घनाक्षरी तिमिर के रिपु अभी उदित हुए ही नहीं। यहाँ-वहाँ-कहाँ गया तम जो घना रहा।। आस-पास कूक कूक कोयल है कुहू करे। खोजिए तो … Read More

चेतक का रण- कौशल एवं स्वामी- भक्ति / सीताराम चौहान पथिक

हल्दी घाटी संग्राम  जून 1576 चेतक का रण- कौशल एवं स्वामी- भक्ति  महाराणा प्रताप जयंती पर यह चेतक का प्रसंग सीताराम चौहान द्वारा स्वरचित   खण्ड काव्य स्वाभिमानी महाराणा प्रताप से … Read More

zakhmee sach – ज़ख्मी सच / सीताराम चौहान पथिक

zakhmee sach – ज़ख्मी सच / सीताराम चौहान पथिक प्रस्तुत  कविता में लेखक के  द्वारा  व्यक्त किया गया है कि भारत की  आजादी में कितने महापुरुषों ने अपने जीवन की आहुति … Read More

बिना मास्क के/डॉ० सम्पूर्णानंद मिश्र | Bina mask

बिना मास्क के /डॉ० सम्पूर्णानंद मिश्र | Bina mask प्रस्तुत  कविता   बिना  मास्क के / डॉ० सम्पूर्णानंद मिश्र  की स्वरचित रचना प्रेरणा दे  रही है कि  समाज के प्रबुद्ध लोगों  को … Read More

नीति – दशक | Neeti – Dashak/सीताराम चौहान पथिक

नीति – दशक | Neeti – Dashak/सीताराम चौहान पथिक नीति – दशक जो आया संसार  में , जाएगा इक रोज़ । राजा – रंक  -फकीर सब, महाकाल के भोज ।। … Read More

Man Ka Deepak phir jal jae- मन का दीपक फिर जल जाए

Man Ka Deepak phir jal jae- संपूर्ण सृष्टि की जलवायु में फैली महामारी से मानव जीवन संकटग्रस्त हो गया है।मनुष्य चिड़िया घरों में कैद पशु पक्षियों की भांति सीमित संसाधनों … Read More

World Environment Day Poem in hindi- हाय , पर्यावरण

World Environment Day Poem in hindi- विश्व पर्यावरण दिवस  हर वर्ष ५ जून को  प्रतिवर्ष  मनाया जाता है इस  दिवस को मनाने  की घोषणा  अमेरिका ने की थी।  इस दिवस … Read More

पर्यावरण दिवस पर कविता- paryavaran par kavita

पर्यावरण दिवस पर कविता  | paryavaran par kavita- पर्यावरण दिवस पर सभी पर्यावरण प्रेमियों को  समर्पित  रचना   पर्यावरण / डॉ विष्णु प्रताप सिंह   की  प्रस्तुत है  : पर्यावरण मैंने अपने … Read More

chhand-panchchamar | छंद-पंचचामर- बाबा कल्पनेश

chhand-panchchamar १. छंद-पंचचामर रमानिवास जागिए,मही तुम्हें पुकारती। प्रभात हो सके धरा,सुहाग माँग धारती।। तुम्ही विभात प्राण हो,प्रकाश पंथ खोल दो। विषाणु नष्ट हो सके,हवा सुमिष्टि घोल दो।। जवान भी किसान … Read More

Kahaan Par Chhipee Ho – कहां पर छिपी हो ॽ

Kahaan Par Chhipee Ho : प्रस्तुत कविता सूफीवाद पर आधारित है जहां प्रेमी अर्थात नायक अपनी प्रेमिका अर्थात ब्रह्म को पाने के लिए कठोर साधना करता है । कहां पर … Read More

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