fikar not hindi short story/अंजली शर्मा

 fikar not hindi short story

फिकर नॉट लघु कथा 

 

रामू सुबह-सुबह शराब पीकर लड़खड़ाते हुए आ रहा था। मुझे देखते ही दोनों हाथ जोड़ लिये और कहना लगा, दीदी माफी देना, मैने थोड़ी सी पी रखी है। मैने कहा,इसे तुम थोड़ा सा कहते हो।लोग सुबह-सुबह चाय पीते हैं तुम शराब पी लेते हो। कहने लगा दीदी आज मन किया तो थोड़ा सा..!! लेकिन मैं तो तुम्हें रोज देखते हूँ आजकल सुबह-सुबह से पी कर आ जाते हो। दोनों हाथ जोड़ लिये; दीदी माफी दे दो। पर मुझसे माफी माँगने से क्या होगा! सेहत तुम्हारी खराब होगी। इसी तरह पीते रहे तो बीमार पड़ जाओगे, शराब पीते-पीते किसी दिन मर जाओगे।

 नहीं-नहीं चिंता मत करो। मुझे कुछ नही होगा। यमराज का कोई मजाल नहीं कि मुझे हाथ लगा दे। मेरी घरवाली मेरे लिये तीजा, करवाचौथ, वटसावित्री और न जाने क्या-क्या महालक्ष्मी, सोलह सोमवार और कितने प्रकार का व्रत करती है। मुझे यमदुत याकोई बीमारी छू भी नहीं सकता, फिकर Not ..।

       अरे पगले,तुम्हारी पत्नी जो व्रत उपवास करती है ये उसकी आस्था उसका धर्म है। परंतु तुम्हारी मृत्यु तुम्हारे कर्म पर निर्भर करता है। तुम्हारी पत्नी सिर्फ़ इसलिये व्रत-उपवास नहीं करती की तुम्हारी आयु लम्बी हो जाय बल्कि, इसलिए करती है ताकि, तुम्हें सद्बुद्धि आ जाय और घर में सुख और शांति बनी रहे। फिकर Not, कहता है।

       अब अंग्रेज़ी चढ़ी है तो थोड़ी अंग्रेज़ी तो निकलेगी ही।

 

अंजली शर्मा

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