अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस | 21मई | सम्पूर्णानंद मिश्र

अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस
(21मई)

चाय
भले ही न हो
अमृत

लेकिन
अमृत से कम भी नहीं है

यह रिश्तों को पकाती है
टूटे हुए दो दिलों को आपस में मिलाती है

जब फटने लगती है
रिश्तों की कमीज
तो फटे हुए रिश्तों की कमीज
के जीवन को बचाती है

यह
आज की संजीवनी बूटी है
इसने कलियुग के
कई -कई लक्ष्मण के मुरझाए ओठों पर पलाश के फूल खिलाए हैं

और बंजर मन को फिर से ऊर्वरा बनाए हैं
इसने कई घरौदों को टूटने से बचाया है

और
मरे रिश्तों को
चाय की चुसकी से
फिर से जिलाया है

कई लड़कियों की शादियाँ
चाय कैफे में ही तय हुई है

यह सुबह का आहार है
टूटते हुए दिलों का तार है

भट्टी पर पकती हुई चाय
रिश्तों को पकाती है
और
एक साथ
कई- कई लोगों को मिलाती है

यह केवल चाय नहीं है
चौपाल पर
समस्याओं के समाधान के लिए
आमजन की राय है

इसकी दो बूँद ही सार है
जीवन का सबसे बड़ा आधार है

सम्पूर्णानंद मिश्र
शिवपुर वाराणसी
7458994874

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