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Mothers day Hindi Geet | पवन शर्मा परमार्थी - HindiRachnakar

Mothers day Hindi Geet | पवन शर्मा परमार्थी

Mothers day Hindi Geet

माँ ममता की मूरत है जग जननी है


माँ ममता की मूरत है, जग जननी है,
बाकी तो सारी ही दुनिया ठगनी है।
(१)
नौ माह तक जिसने अपना गर्भ बचाया,
जन्म दे माता ने बड़ा ही कष्ट उठाया,
खुद गीले में सोती रही माँ हमारी,
हमको सूखे में सुलाया, नहीं रुलाया,
फिर क्यों न माता सबको अच्छी लगनी है ?
माँ ममता की मूरत है, जग जननी है ।
(२)
माँ तो दुनिया की एक बड़ी सच्चाई है।
उससे बड़ा न ईश्वर, अल्लाह, साईं है,
बड़े-बड़े ऋषि मुनियों ने भी तो सज्जनों,
ममतामयी माता की ममता पायी है,
क्योंकि माँ ही सबसे अनोखी अपनी है ।
माँ ममता की मूरत है, जग जननी है ।
(३)
कर्ज़ माँ का कोई चुका नहीं पाया है ।
भाग्यशाली, जिस पर माँ की छाया है ।
माँ का आशीर्वाद जो लेकर चलता है,
उसने समझो अच्छा पुण्य कमाया है,
माँ का रूप विशाल कि जैसे धरनी है ।
माँ ममता की मूरत है, जग जननी है ।
(४)
जो माँ की सेवा में ही तत्पर रहता है,
माँ का उस पर प्यार परस्पर रहता है,
उसके चरणों में शीश झुकाना ही चाहिये,
स्वर्ग सदा माँ के चरणों में रहता है।
कभी वो शीतल शान्त, कभी वो अग्नि है ।
माँ ममता की मूरत है, जग जननी है ।।
(५)
माँ से ज्यादा नहीं कोई भी सुन्दर है।
उसके दिल में प्यार का समुंदर है।
माँ बच्चों के लिए सदा उदार रहे,
जैसी बाहर, वैसी ही वो अन्दर है,
लो संकल्प कि माँ की सेवा करनी है ।
माँ ममता की मूरत है, जग जननी है ।।

(६)
माँ बच्चों को अपना दूध पिलाती है,
हो जरा तकलीफ तो नैनों में आंसू लाती है,
उसके दूध में मानो अमृत होता है,
जिसे पिलाकर हमको पुष्ट बनाती है,
माँ तो माँ है, चाहे सीता, अंजनी है।
(७)
माँ का लालच होता नहीं संतान से,
चाहती है औलाद को जी जान से,
अच्छे बुरे हों चाहे जैसे भी बच्चे,
सबको गले लगाती है माँ शान से,
फिर क्यों न मन में श्रद्धा जगनी है?
(८)
माँ के पदचिन्हों पर जो भी चलता है,
वही तो जीवन में फूलता, फलता है,
करता जो भी माँ का सम्मान हमेशा,
उसको ही जीवन में मिले सफलता है,
मात प्रेम का सागर है, दुःखहरनी है ।
माँ ममता की मूरत है जग जननी है।
(९)
ये विनती माँ का सदा सम्मान करो,
भूल से ही भी ना उसका अपमान करो,
माँ के आशीर्वाद में शक्ति होती है,
उसकी ममता पर सदा अभिमान करो,
ऊँची हमने माँ की शान समझनी है ।
माँ ममता की मूरत है जग जननी है ।
(१०)
जो मानव माँ का सम्मान नहीं करता,
माँ के दर्द में शामिल कभी नहीं रहता,
ऐसे निष्ठुर प्राणी को सुख नहीं मिले,
उसको कोई भी आदमी नहीं कहता,
सच है जैसी करनी, वैसी भरनी है।
माँ ममता की मूरत है जग जननी है ।


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पवन शर्मा परमार्थी
कवि-लेखक
दिल्ली, भारत ।

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