Hamaare Purakhe – हमारे पुरखे / सम्पूर्णानंद मिश्र
हमारे पुरखे हाड़ मांस से ही बने हुए थे हमारे पुरखे हमीं लोगों की तरह भिन्न नहीं थे हवाई यात्रा तक नहीं की थी अधिकांश ने इनमें से कई तो … Read More
हमारे पुरखे हाड़ मांस से ही बने हुए थे हमारे पुरखे हमीं लोगों की तरह भिन्न नहीं थे हवाई यात्रा तक नहीं की थी अधिकांश ने इनमें से कई तो … Read More
Latest Poetry in Hindi | Motivational poetry | Emotional Poems फिर बहार आयेगी फिर बहार आयेगी तम की रजनी छंट जायेगी आज मौत सहन में खड़ी है ज़िंदगी से दो- … Read More
हस्ताक्षर बियाबान का /सम्पूर्णानंद मिश्र | New Poetry हस्ताक्षर बियाबान का कोसा जा रहा है वक़्त को इस समय कि ज़ालिम है बेरहम है हस्ताक्षर है उजड़े बियाबान का सिंदूर … Read More
hindi kavita रखती है आबरू रखती है आबरू गुज़र रहे हैं माना कि बहुत बुरे दौर से हम सब लेकिन न उखड़े विवेक और धैर्य का खूंटा भलाई है पूरे … Read More
Hindi Kavita khoonkhaar Bhediya खूंखार भेड़िए हो! रिश्ता गहरा तुम्हारा हमारा एक अटूट प्रेम हममें तुममें कभी हंसते थे खिलखिलाते थे मीठी- मीठी बातें बतियाते थें मर मिटते थे एक … Read More
जानवर भीतर का जानवर भीतर का न जाने कब से देहगाड़ी पर भीतर के मरे हुए पशु को ढोते रहे यूँ ही हर बार फेंकते रहे सड़क पर बियाबान में … Read More
Hindi Poems of Sampurnanand Mishra क्रूर काल ग्रास हो गया क्रूर काल का तीस साल में ही रामू विधवा बना दिया पत्नी को भरी जवानी में छिप-छिप कर रोने लगी … Read More