संयम — जीवन की सच्ची शक्ति | आकांक्षा सिंह “अनुभा”

संयम — जीवन की सच्ची शक्तिआकांक्षा सिंह “अनुभा”उद्घोषिका, आकाशवाणी,रायबरेली । संयम है जीवन की वो डोरी,जो बिखरते मन को थाम लेती है।आंधियाँ चाहे कितनी भी प्रचंड हों,ये राह से हमें … Read More

उपहार | जनकवि सुखराम शर्मा सागर

उपहार | जनकवि सुखराम शर्मा सागर उपहार उपहार स्वरूप मानव शरीर,देवी शक्ति से मिल जाती है,जो जन्म लिया इस धरती पर,मृत्यु अटल सत्य आ जाती है। बढ़ते जल में काठ … Read More

लेखनशाला की पहल — पहली ‘राष्ट्रीय साहित्य प्रतियोगिता’ का आयोजन

रायबरेली। देश के साहित्य प्रेमियों के लिए एक सुखद अवसर लेकर आई है लेखनशाला संस्था, जो राष्ट्रीय साहित्य को एक नवाचारी दिशा देने के उद्देश्य से पहली बार ‘राष्ट्रीय साहित्य … Read More

पुरानी दिल्ली के प्लेटफार्म नंo 11 पर लिखी एक रचना | ट्रेन की प्रतीक्षा में

पुरानी दिल्ली के प्लेटफार्म नंo 11 पर लिखी एक रचना-ट्रेन की प्रतीक्षा में -दिल्ली से बाहर हूँ जब से होश सँभाला हूँया यूँ कहिए कि देखता आ रहा हूँमुर्दा बचपन … Read More

मरने लगते हैं आप | सम्पूर्णानंद मिश्र

मरने लगते हैं आप | सम्पूर्णानंद मिश्र मरने लगते हैं आप मरने लगते हैंआप धीरे- धीरे जब आपकी जिह्वासो जाती हैकिसी की तारीफ किए बिना मर जाते हैं आपजब नहीं … Read More

निष्कलंक तंतु (विरह गीत) | भारमल गर्ग “विलक्षण”

निष्कलंक तंतु (विरह गीत) 🌸 कालिंदी की लहरों में बिखरा, निशि का नीरव संवाद,  तुम्हारी याद का अग्नि-कण, जलता है अधरों पर आज।  विधाता के लेखनी से टपका, विषाद का अमृत-बूँद,  क्योंकर भरूँ … Read More

कविता – प्रकृति की सुंदरता | आकांक्षा सिंह ‘अनुभा’

कविता – प्रकृति की सुंदरता———————————— देखो ये नज़ारे, सब हैं साथ तुम्हारे,जी लो इस पल को तुम, हैं ये पल तुम्हारे,देखो ये नज़ारे, सब है साथ तुम्हारे…….! देखो इन पंछी … Read More

मुड़े हम आज जगत से जगदीश्वर की ओर | विश्वास ‘लखनवी’

मुड़े हम आज जगत से जगदीश्वर की ओर | विश्वास ‘लखनवी’ मुड़े हम आज जगत से जगदीश्वर की ओरनिगल कर मधुर तमस की निशा हुई है भोर हुये उत्तीर्ण किये … Read More

हे नाथ तुम्हारी दया-दृष्टि से | हरिश्चन्द्र त्रिपाठी’हरीश’

हे नाथ तुम्हारी दया-दृष्टि से,जग का सारा काम हो रहा।कण-कण में दिखती नई चेतना,नवल भोर सुखधाम हो रहा।टेक। नित कल-कल,छल-छल नदिया बहती,नित झर-झर निर्झर झरता है।तेरे चॉद-सितारों से ही,यह अम्बर … Read More

लगन के आगे मंजिल क्या ? | अनुज उपाध्याय

लगन के आगे मंजिल क्या ? लगन के आगे मंजिल क्या,किरण के आगे बादल क्या,दृष्ट के आगे दर्पण क्या,सृष्टि से बढ़के अर्पण क्या,जीवन से बढ़कर झूठा क्या है,मौत से बढ़कर … Read More

हारे हुए लोग कहाँ जायेंगे ? ? | रिंशु राज यादव

हारे हुए लोग कहाँ जायेंगे ? ? हारे हुए लोगों के लिए कौन दुनिया बसाएगा?उन पराजित योद्धाओं के लिए ,तमाम शिकस्त खाए लोगों के लिए। प्रेम में टूटे हुए लोग,सारी … Read More

चरणों में यह जीवन है | जय शिव शंकर जय अविनाशी | कोई नहीं है अपना | ऋतु सावन की आई है | हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’

गुरु-पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूज्य गुरुदेव को समर्पित एक गीत– शीर्षक:-चरणों में यह जीवन है। रोम-रोम में नाम तुम्हारा,सुधियों में छवि तेरी है,अनुप्राणित यह जीवन तुमसे,तुमसे दुनिया मेरी है। … Read More

जीवन ही प्रेम | मन से मन का मान रख | कैसे खेली हम आज कजरिया | सावन की घटा

1 .जीवन ही प्रेम है। मुहब्बत हर कण,हर क्षण में होता है,कोई खोकर पाता,कोई पाकर खोता है।पशु-पक्षी पेड़-पौधे,सबमें प्रकृति-प्रेम है,नजर तो जरा घुमाओ,सूक्ष्मता में भी स्नेह पाओ।सावन का प्रेमी है … Read More

ज़िन्दगी आसान तो भी नही थी | पुष्पा श्रीवास्तव ‘शैली’

ज़िन्दगी आसान तो भी नही थी।लिखती रहीफाड़ती रहीबहुत सारे शब्द हवाओं में उड़े।जरूर बतियाए होंगे मेरे बारे में। वो चिमनी की काॅंपती लौ भीकुछ तो सोचती रही होगी,जब उसको हाथों … Read More

होली गीत : लाल हरा रंग नीला पीला,लेकर आई होली |दुर्गा शंकर वर्मा ‘दुर्गेश’

होली गीत लाल हरा रंग नीला पीला,लेकर आई होली।होली गीत सुनाती आई,फगुहारों की टोली।ढोल,मंजीरा,झांझ लिए,सब होली गीत सुनावें।सुंदर-सुंदर गीत सभी के,मन को खूब लुभावें।सब के सब मस्ती में डूबे,छाने भांग … Read More