बदनसीबी | संपूर्णानंद मिश्र
बदनसीबी बदनसीबी जब आती हैअपना ही मुंह बिराती है बदनसीबी की मारीउस बेटी कीआंखें जब खुलीतब गंदीबस्तियां स्वागत मेंखड़ी थी उसके एक गहन अंधेरे मेंबदनसीब बच्चीभविष्य का असफलउजाला ढूंढ़ रही … Read More
बदनसीबी बदनसीबी जब आती हैअपना ही मुंह बिराती है बदनसीबी की मारीउस बेटी कीआंखें जब खुलीतब गंदीबस्तियां स्वागत मेंखड़ी थी उसके एक गहन अंधेरे मेंबदनसीब बच्चीभविष्य का असफलउजाला ढूंढ़ रही … Read More
अर्चना | सम्पूर्णानंद मिश्र अर्चनाकीअभिव्यक्तिगूंगे के मीठे फल जैसा है जिसकारसास्वादन सिर्फ़ किया जा सकता हैवर्णन नहीं जीवन मेंउनकीअर्चना होनी चाहिए अवश्य जोत्याग के धागेऔर समर्पण की सूईसे संबंधों के … Read More
परीक्षा पर व्यंग्यात्मक कविता | Poem on Exam in Hindi – परीक्षा पर कविता परीक्षा बोर्ड परीक्षा मेंएक परीक्षार्थी नकलकरते हुए पकड़ा गया बहुत रोया चिल्लायाअपने तर्क सेजिला विद्यालय निरीक्षकसे … Read More
नसीहत | सम्पूर्णानंद मिश्र | हिंदी कविता पिता ने पुत्र कोनसीहत देते हुएकहा कि बेटाजिंदगी में पानी की तरहमत बहनासपाट जीवन मत जीनारुकावटें आएंगीतुम्हें विचलित करजायेंगीतोड़ने का प्रयास किया जायेगाटूटना … Read More
आदमी | सम्पूर्णानंद मिश्र आदमी आज बेचारा हैपरिस्थितियों का मारा हैमहंगाई से तंग हैसिस्टम से मोहभंग हैस्वयं से जंग हैअब जिंदगी में न हीकोई रंग हैन अपने अब संग हैरोज़ … Read More
संग हम साथ होंगे | सम्पूर्णानंद मिश्र क्योंभाग रहे होहाथ मेरा छुड़ा रहे होमैं लेने जब आऊंगीलेकर ही जाऊंगीफिर भी भाग रहे होबाहें मेरी छुड़ा रहे होकत्ल भी करते होइल्ज़ाम … Read More
ख़ारिज करता है पिता / सम्पूर्णानंद मिश्र नहीं पनपसकता लघु पौधाबरगद की छांव मेंपिताख़ारिज करता हैउक्त कथनक्योंकिस्पष्ट अंतर दिखाई देता हैपिता और बरगद मेंजहां पिताआत्मीयजन कोअपना सिरमौर बनाता हैस्नेह के … Read More
सलीब / सम्पूर्णानंद मिश्र सलीब जीज़सतुम भोग-विलास के लिएनहीं जन्मे थेबल्कि किसीऔर प्रयोजन के लिएतुम्हेंडराया गयाविभिन्नयातनाएं दी गईंतुम्हारे ऊपरपत्थर फेंके गएबेथलहम मेंतुम्हें दुष्चरित्रघोषित किया गयाप्रलोभ के चक्रव्यूह मेंफंसाया गयादुर्योधन और … Read More
विशिष्ट रचना / सम्पूर्णानंद मिश्र विशिष्ट रचनाहोती हैंस्त्रियांविधाता कीनिष्कपट होती हैंनिस्वार्थ होती हैंसमर्पित होती हैंशब्दों के कटु वाणी के बाणका संधान नहीं करतीक्रोध की ज्वालाप्रज्वलित होने परकिसी पर तेज़ाब नहीं … Read More
कलुआ की मौत / सम्पूर्णानंद मिश्र आज सुबह-सुबह कलुवा कुत्ताठंड लगने सेमर गयाबहुत वफादार थाएक सशक्त पहरेदार थामानवीय मूल्यों में कत्तईनहीं विश्वास थाआदमियों के चाल-चलनको दूर से ही भांपता थाखाकी … Read More
श्रद्धा बनाम छल | सम्पूर्णानंद मिश्र नारी जब जबतुमको कुचला जाता हैहृदय दहल जाता हैअब तुम सीता लक्ष्मीअहल्या जैसी बन करजी नहीं सकती होदिन में भी तुमसुरक्षित नहीं रह सकती … Read More
मूक / सम्पूर्णानंद मिश्र मूक मूकहोना आज बहुतजरूरी हैनिकल जाता हैजीवन की हर उलझन सेमूक व्यक्तिजो जितना बोलता हैउतना ही लड़ता हैबाहर और भीतर दोनोंहमेशावहअशांत रहता हैअहंकार कोघलुआ में ले … Read More
काली रात | सम्पूर्णानंद मिश्र (16 दिसंबर 2012) राष्ट्र कलंकित करने वालों कोसजा आखिर मिल गईसर्वोच्च न्यायालय के आदेश सेचार दरिंदों की गर्दनें झूल गईएक दिन भी ऐसा नहीं हुआजिस … Read More
वसुधैव कुटुंबकम् / हूबनाथ हमारी बस्तियाँभले पक्की हो गई हैं घरों में बन गएशौचालयतुम्हारे घरों की तरह हमारे कपड़ेतुम्हारी तरह साफ़सुथरे हो गए हमें भी मिलने लगीदो वक़्त की रोटीभरपेट … Read More
परख किस पायदानपर खड़े हैंमूल्यांकन हो इसकाक्योंकि फूलों कापायदानपहुंचा तो सकता है शीर्ष परलेकिन टिका नहीं सकतादेर तक हमें वहांहो सकता हैख़तरनाकएवं जानलेवाजिस पायदान परमुसीबतों का शूल होरखो धीरे- धीरे … Read More