निवाला | कहानी | डॉ0 सम्पूर्णानंद मिश्र
आज बृंदावन कालोनी के डी0 सेक्टर में सुरेश बाबू के यहाँ खूब ढोल नगाड़े बजाए जा रहे हैं। संगीत का स्वर कालोनी की छत को पार करते हुए बाजार तक … Read More
आज बृंदावन कालोनी के डी0 सेक्टर में सुरेश बाबू के यहाँ खूब ढोल नगाड़े बजाए जा रहे हैं। संगीत का स्वर कालोनी की छत को पार करते हुए बाजार तक … Read More
स्टेटसपर लगायी तस्वीरेंजहाँ क्षणिक खुशी देती हैं वहींदूसरों को अपनी हैसियतदिखाने का सशक्त प्लेटफॉर्म है अन्य कोई माध्यम नहीं हैजहाँ इतनी तीव्रता सेमस्तिष्क में चल रहे अपने विचारों कोदूसरों तक … Read More
मज्जन फल पेखहिं तत्काला निःसंदेह शरीर भीगता हैमज्जित होने से लेकिनआत्मा नहीं आत्मा तो भीग सकती हैसिर्फ और सिर्फविचारों की पवित्रता के जल से नकारात्मकता की चादर की कुज्झटिकाओं सेजब … Read More
लालच विहीन आँखेंदेखना चाहती हैंछूना चाहती हैंऔर चाहती हैं कुछ वक्तअपनी संतति से लेकिन भौतिकता कीअंधी दौड़ मेंआज की पीढ़ीसस्ते दामों मेंअपना वक्तबेचकरजब घर आती है तो वह फूली नहीं … Read More
स्वागत | सम्पूर्णानंद मिश्र पूरा देशखड़ा हैनववर्ष के स्वागत में दरअसलअतीत के घावजो हमारी देह पर थे कुछ सूख चुके हैंकुछ सूख रहे हैंऐसे मेंकड़वी स्मृतियों के कांटेंउस घाव कोफिर … Read More
मौत | हिंदी कहानी | सम्पूर्णानंद मिश्र बनारस उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी है। यहां सुबह तीन बजे से घाटों पर संतों की आवाजाही होने लगती है। मंदिरों में घण्टियां … Read More
नगरवधू आम्रपालीतुम बहुत सुंदर थीयही तुम्हारा कसूर थाइसलिएतुम्हारे सौंदर्य का पान करने के लिएवैशाली और मगध निरंतर लड़ते रहेएक बार नहींसौ बार फाड़ी गई मर्यादा की चादरपिता- पुत्र के द्वाराप्रतिद्वंद्वी … Read More
हुआ जीवन बेहालतपती इस गर्मी सेजल रही धरतीजल रहा आकाशतपती इस गर्मी सेजल रही है युवाओं की आशाबेरोज़गारी की आग मेंकोई बताए जाएं किस राहजब जल गई हो सारी चाहतपती … Read More
पिता का स्वर / सम्पूर्णानंद मिश्र आज सुनामैंने स्वर पिता काबिल्कुल भोर मेंकह रहे थे बेटाघर की याद आती हैवैसे अच्छा हैयहां अनाथाश्रम में भीवहां 40/45 के मकान मेंमेरा विस्तार … Read More
चुप्पियां | सम्पूर्णानन्द मिश्र | Chuppiyan चुप्पियां टूटनी चाहिएचुप्पियां वक़्त परताकि जल न जायझूठ की आंच पर सत्य की रोटीमानाकिचुकानी पड़ती हैएक बहुत कीमतचुप्पियों को बोलने कीलेकिन तोड़ने से इस … Read More
स्वतंत्रता दिवस 2021 पर कविता | Poem on Independence day in hindi मनाने जा रहे हैं जब पचहत्तरवां स्वतंत्रता दिवस कल हम लोग तब दिमाग की नदी में कई सवाल … Read More
वे दिन बचपन के | Mera Bachpan Par Kavita वे दिन बचपन के ,डॉ. संपूर्णानंद मिश्र द्वारा रचित बचपन के दिनों में घटित आनंददायक घटनाओं का सुंदर चित्रण करती हुई … Read More
अहंकार पर कविता- अहं | Poem on Ahankar in hindi डॉ सम्पूर्णानंद मिश्र की हिंदी कविता अहं संदेश देती है कि अहंकार रोग है इसका इलाज जरुरी है मानव जीवन … Read More
लौटते वक़्त श्मशान से | lautate vaqt shmashaan se लौटते वक़्त श्मशान से लौट रहा था श्मशान से गांव के जग्गू दादा का शवदाह करके कुछ रुआंसा था क्योंकि जल … Read More
Khaamosh- ख़ामोश/ सम्पूर्णानंद मिश्र नमस्कार आपका हिंदीरचनाकर में आपका स्वागत है आज हम बनारस के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. सम्पूर्णानंद मिश्र की स्वरचित रचना खामोश पढ़ेंगे। जो प्रकृति से संबंधित है इस … Read More