पहलगाम की घटना पर आधारित | वेदना सुहाग की | नरेन्द्र सिंह बघेल

पहलगाम की घटना पर आधारित | वेदना सुहाग की | नरेन्द्र सिंह बघेल

पहलगाम की घटना पर आधारित

!!!!!!!!!! वेदना सुहाग की !!!!!!!!!
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वेदनाएं हमारी सुनें कौन अब ,
हम अधूरी छुवन किससे कह पाएंगे ।
ये महावर ये बिछुआ कहां अब धरें ,
बोलो तुम बिन इन्हें कैसे रख पाएंगे ।।

सारे सपने तो मेरे हवन हो गये ,
प्यार की ज्योति ऐसी जलाना न था ।
दो कदम साथ मिलकर के चल न सके ।
यूँ तुम्हें जिंदगी में तो आना न था ।।
साथ मिलकर जो मीठे सपन थे बुने ,
बोलो मेरे सपन अब किधर जाएंगे ।।
वेदनाएं हमारी ——-

यूँ सफर में अकेले बिछड़ना ही था ,
इन हरी वादियों में तुम आए थे क्यूँ ।
वेद वैदिक की वेदी औ फेरों के संग ,
मीठे सपने यूँ मिलकर सजाए थे क्यूँ ।।
मांग सूनी ये कर के विदा हो गये ,
बोलो फिर हम भला अब किधर जाएंगे ।।
वेदनाएं हमारी ———-

ये चूड़ी ये कंगन ये बेंदी मेरी ,
पूँछतीं हैं भला किससे प्रश्न करें ।
इन हंसीं वादियों का यही था सिला ,
क्यूँ आकर यहां सारे अरमां मरे ।।
लौट आओ कि तुमको हमारी कसम ,
बोलो तुम बिन भला कैसे रह पाएंगे ।।
वेदनाएं हमारी ———-

प्रश्न तुमसे नहीं सारी दुनियाँ से है ,
हम क्यूँ कर के इतने बड़े हो गये ।
सभ्यता की लकीरें बहकने लगीं ,
आज हम किस मुहाने खड़े हो गये ।।
बाँटना है अगर प्यार बाँटें न क्यूँ ,
हम बिना प्यार के अब किधर जाएंगे ।।
वेदनाएं हमारी सुनें कौन अब ,
हम अधूरी छुवन किससे कह पाएंगे ।।
**** नरेन्द्र ***

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