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Poem on friendship in Hindi | hindi poem on dosti | दोस्ती पर कविता - HindiRachnakar

Poem on friendship in Hindi | hindi poem on dosti | दोस्ती पर कविता

Poem on friendship in Hindi :  हिंदीरचनाकर  पर कानपुर से  युवा साहित्यकार आशुतोष झा ने  दोस्ती पर  एक  रचना  मेरे दोस्त पाठको  के  सामने  प्रस्तुत  की  है ,  दोस्ती  एक मित्र  का दूसरे मित्र  से  आत्मीयता  का  सम्बन्ध  है , जब  मित्रता  की  बात  की  जाए तो वह  सच्चे मायनों में  एक दूसरे  के  सुख -दुःख  को  बाँटना  होगा तभी  मित्रता सार्थक होगी ,  ऐसा  देखा गया  जब हम  काफी दुखी होते है  तो  परिवार के सदस्यों को पीड़ा न बता कर अपने परम मित्र को बताते है , इन सभी भावो के साथ प्रस्तुत है रचना

“मेरे दोस्त”


कई पेड़ों की तरह वह भी एक पेड़ था
शब्दों के खांचों से दूर………….

छुटपन में कभी कोई गुठली फेंक दिया था
प्रकृति ने अपना काम शुरू किया था

समय गुज़रा लाल कोंपल था दिखा
ख़ुशी हुई बच्चे ने बच्चे को देखा

एक पेड़ जो मुझे जन्म से देख रहा था
एक पेड़ जिसको जन्म से मैं देख रहा था

एक अनजान दरख़्त
एक थोड़ा जाना पहचाना ……..

मेरे दुआर का पेड़ मेरी ऊंचाई लाँघ गया
ख़ुशी ख़ुशी मैं उसके कंधों पर भाग गया

बहुत से जीव मेरे साथ वहाँ थे आते
हँसते कूदते कभी मुझे काट जाते……

परन्तु मुझे जन्म से जो पेड़ देख रहा था
वह खांचों में आ गया था
उसे भी सभी द्वारा आम का पेड़ कहा गया था…..

समय ने करवट ली वह मेरे रूबरू हुआ
वह तो खुश था उससे ज्यादा मैं हुआ
समय न होते हुए भी कुछ तो था
हवाएं गर्म होते हुए भी मखमली थी
ख्यालों में अब नरमी थी

जाने क्या थी वह अनुभूति….
कौन थी बात सच्ची कौन थी झूठी

अनजान ऊर्जा प्राप्त होती रही
काल की धारा बहती रही

एक दौर रीता …..
एक दौर बीता …

जीवन ने रंग बदला बरसात आ गई
नए पत्तों से हरियाली छा गयी….

फिर से समय स्याह हुआ
दरख्त सब देख चुका था
अपनी सांसें रोक चुका था…..

बहुत मीठे आम थे उसके
हम फल के लिए ही भागते हैं
ढोल पीटकर ही कुछ त्यागते हैं…..

आज उसकी सूखी देह है मेरे सामने
इस मोड़ पर नही जाता है उसे कोई थामने….

मेरे दुआर का पेड़ मेरे ऊपर हँसता है
कहता है अगर हम भी फल साधने लगें
तो ये फल हमें बांधने लगे …………

तू क्यों उदास होता है
क्यों विचारों का दास होता है

यही तो जीवन है
किसी का जन्म ….किसी का मरण है

कोई पास आता है
…कोई भाग जाता है

कोई पटरी पर चलता है
………कोई सत्य टटोलता है

यह कह कर वह मुझे गले लगा लेता है
हर पल हर हालात में खुश रहता है ……….


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आशुतोष झा

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