Poem On Nature | short poem on nature in hindi

Poem On Nature | short poem on nature in hindi

प्रकॄति- पर्यावरण असंतुलन 

चक्रवात बादल का फटना ,
हताश प्रकॄति का उल्कापात।
प्रकॄति पर्यावरण दूषित हुए ,
कोरोनावायरस का प्रतिघात।

कोरोना का उग्र रूप यह ,
निगल रहा है निर्दोषों को ।
सिकुड़ गये सब खूनी रिश्तों ,
खोज रहे हम दोषों को ।

महामारियां आती और जाती,
आलस्य उपेक्षा से बढ़ जाती
पर्यावरण स्वच्छता अपनाते ,
आई आपदाएं चट जाती ।

बच्चे बूढ़े व्यस्क नर- नारी ,
असमय जीवन की बाजी हारी ।
अस्पताल में भीड़ लगी है ,
छीना-झपटी और मारामारी ।

मॄत्यु अटल फिर भी कुछ बंदे ,
कफ़न- चोर अंग  – सौदागर ।
दवा स्ट्रेचर एम्बूलैंस के घपले,
खाली हाथ – खुदा के घर ।

कोरोना से बचो बन्धु वर ,
धोवो हाथ और मास्क लगाओ ।
सामाजिक दूरी का प्रतिपालन ,
कोरोना से पिण्ड छुडाओ़ ।

प्रकॄति  पर्यावरण शुद्धि हेतु ,
उगाओ घर घर तुलसी नीम ।
सुरभित सुमन तरंगित  दे ,
नहीं घर में आए हकीम ।

नदियों में हो स्वच्छ जल ,
और मलिन बहाना पाप ।
वन-महोत्सव नित करो ,
हवन यज्ञ और जाप ।

द्रुत विकास के नाम पर
उद्योग नियंत्रित  यन्त्र ।
पर्यावरण दूषित ना हो ,
नीरोग रहे जन – तंत्र  ।।

कोरोना वायरस आदि रोग ,
दूषित पर्यावरणीय देन ।
प्रकॄति असंतुलन  से छिने ,
पथिक , हॄदर का चैन ।।


poem-on-nature-short-poem-on-nature-in-hindi
सीताराम चौहान पथिक

आपको  Poem On Nature | short poem on nature in hindi / सीताराम चौहान पथिक की  स्वरचित  रचना कैसी लगी , पसंद आये तो समाजिक मंचो पर शेयर करे इससे रचनाकार का उत्साह बढ़ता है।हिंदीरचनाकर पर अपनी रचना भेजने के लिए व्हाट्सएप्प नंबर 91 94540 02444, 9621313609 संपर्क कर कर सकते है। ईमेल के द्वारा रचना भेजने के लिए  help@hindirachnakar.in सम्पर्क कर सकते है | 

अन्य  रचना  पढ़े :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *