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वसुधैव कुटुंबकम् / हूबनाथ

वसुधैव कुटुंबकम् / हूबनाथ हमारी बस्तियाँभले पक्की हो गई हैं घरों में बन गएशौचालयतुम्हारे घरों की तरह हमारे कपड़ेतुम्हारी तरह साफ़सुथरे हो गए हमें भी मिलने लगीदो वक़्त की रोटीभरपेट … Read More

पॉव भटक न जायें सुन तू / हरिश्चन्द्र त्रिपाठी’ हरीश’

पॉव भटक न जायें सुन तू / हरिश्चन्द्र त्रिपाठी’ हरीश’ कॉटों भरी डगर जीवन की,जिस पर तुझको चलना है,पॉव भटक न जायें सुन तू,प्यारी मेरी ललना है। टेक। तुझे पता … Read More

मुद्दतें हो गईं मुस्कराए हुए / राजेंद्र वर्मा ‘राज’

मुद्दतें हो गईं मुस्कराए हुए / राजेंद्र वर्मा ‘राज’ कितने बादल उदासी के छाए हुए।मुद्दतें हो गईं मुस्कराए हुए।। अब मैं अपना किसी को भी कहता नहीं।जिनको अपना कहा सब … Read More

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तुम्हारी तोतली बोली / पुष्पा श्रीवास्तव शैली

तुम्हारी तोतली बोली / पुष्पा श्रीवास्तव शैली तुम्हारी तोतली बोलीजब धीरे धीरे बदलने लगीसाफ आवाज में ,तब भी मैं डरी।तुम्हारे नन्हे कदम जबबिना मेरे सधने लगेतब भी मैं डरी।तुम्हारी आंखों … Read More