hindi poem on saraswati mata /विद्या

मां सरस्वती के चरणों में समर्पित यह कविता

(hindi poem on saraswati mata)


विद्या


विद्या ईश्वर की अनुपम देन है
कोई इसे ना छीन सके
इसकी कृपा अगर तुम पर हो तो
सफलता के हर द्वार चाहू और खुले
इसे अर्जित करने के खातिर
पहले तुम अपना जीवन अर्पण करो
इसका आलिंगन कर तुम अपना जीवन अमृत्तुल्य करो
विद्या रूपी पंख लगा कर
तुम नव को छू सकते हो
अज्ञानता के बादल छठे विद्या से
ज्ञान से आलोकित जीवन होता है
और तुम्हें जीवन पथ की यात्रा पर
कोई पराजित नहीं कर पाता है
विद्या व अक्षय भंडार है
जो कभी ना खत्म होता है
विद्या से धरती पर जीने की
हर राह सुगम हो जाती है
विद्या हीन मनुष्य संसार में
मां शारदे के वर से वंचित रहता है

hindi poem on saraswati mata

प्रेमलता शर्मा
रायबरेली

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