hindi basant geet -फागुन आया रे/सुरेंद्र शर्मा सुमन

फागुन आया रे।

(hindi basant geet)


नूतन लिए उमंग झूमकर फागुन आया रे।
रोम रोम में जन जन के उल्लास समाया रे।।
फूले हैं पलाश मन भावन सुर्ख गुलाबी रंग।
अंग अंग आसक्ति बढ़ाए ऐसा रमा अनंग।।
पीत वर्ण हो गयी प्रकृति लख हिय हर्षाया रे
बौर आए आमों पर महुओं की मादकता छाई।
भ्रमर करें गुंजार महकती सी लगती अमराई।।
कुहू -कुहू कोयल ने मधुरिम गीत सुनाया रे
झूम रहीं अपनी मस्ती में यह गेहूँ की बालें।
अलसी और चना यौवन का कैसे भार सम्हालें।।
मस्त तितलियों ने सुमनो पर प्यार लुटाया रे
अब गूँजेगी चौपालों पर फागों की स्वर लहरी।
ऋतु बासंती शरमा कर दुल्हन सी मग में ठहरी।।
मौसम भांति भांति के रंग झोली में लाया रे
रोम रोम में जन जन के उल्लास समाया रे।।

hindi- basant- geet
 कवि सुरेंद्र शर्मा सुमन छतरपुर मध्य प्रदेश

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