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बाल कविता | मिलकर मकरसक्रांति मनाएं

बाल कविता | मिलकर मकरसक्रांति मनाएं

आओ चीकू,आओ पीहू ,
मिलकर मकरसक्रांति मनाएं।
आओ बेबू ,आओ कुहू,
रंग बिरंगी पतंग उड़ाएं।

ले धरती से नभ तक पहुँची ,
नाप रही वो अम्बर का छोर।
खुश होकर ,गुनगुन ! बोली,
भइया अब दो मुझको ये डोर।

लेकर चरखी हाथ में,
मिलकर के सब साथ में।
उत्सव हम मनाते हैं ।
तिल के लड्डू खाते हैं ।

शोरगुल सुन कर मम्मी आई,
प्यार से एक बात बताई।
मिलकर तुम सदा ही रहना,
करना न तुम कभी लडा़ई ।

यहाँ के तीज त्योहार निराले,
भारत के तुम राज दुलारे ।
ऐसे काम करना है तुमको,
आसमान में तारा बन चमको ।

प्रतिभा इन्दु
भिवाड़ी, राजस्थान

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