माॅं जब मैं मिलने आऊंगी। पुष्पा श्रीवास्तव “शैली”

माॅं जब मैं मिलने आऊंगी।

माँ जब मैं मिलने आऊॅंगी,मुझको गले लगा लेना।
उलझे हुए मेरे बालों को ,तुम पहले सुलझा देना।

जाने कितने दिनों से अम्मा,
प्यारी नींद नहीं आई।
भूल गई हूं थपकी ,लोरी,
अम्मा जो तुमने गाईं।
अम्मा पहले तनिक बिठा कर,सर मेरा सहला देना।
उलझे हुए मेरे बालों को,तुम पहले सुलझा देना।

पाॅंवों के माॅं नूपुर टूटे,
दिन भर दौड़ लगाने में।
हाथों की सुधि खोयी अम्मा,
सबका स्वाद बनाने में।
रुनझुन वाला नूपुर हमको,अम्मा फिर पहना देना।
अम्मा पहले तनिक बिठा कर,मेरा सर सहला देना।

नटखट माॅंग करूॅं जब अम्मा,
चंदा को बुलवाने की।
जिद कर लूॅंगी फिर से अम्मा,
जिद अपनी मनवाने की।
गोदी में ले अम्मा हमको,फिर से तुम बहला देना।
अम्मा पहले तनिक बिठा कर,सर मेरा सहला देना।

फिर से हमको गुड़िया वाली,
लाल ओढ़निया ला देना।
फिर से गुड्डा, गुड़िया वाला,
अम्मा ब्याह रचा देना।
लोरी के संग हमें सुलाकर,माॅं हमको फुसला देना।
अम्मा पहले तनिक बिठा कर,सर मेरा सहला देना।

पुष्पा श्रीवास्तव “शैली”

रायबरेली।

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