POEM ON UTTARAKHAND IN HINDI | उत्तराखंड पर कविता
POEM ON UTTARAKHAND IN HINDI | उत्तराखंड पर कविता
उत्तराखंड
घाव कैसे भरेंगे, परिवार जिनके बह गए ।
आपदा नभ से गिरी, सपने कहानी कह गए ।।
विनाश के अवशेष देखो, घाटियों में कैद हैं ।
ताश के बावन किले, छितराए और फिर ढह गए ।।
कैसे मन को दें दिलासा, लुट गया जिनका जहां ।
आँसुओ में तर कहानी, आज अपनी कह गए।
प्रकॄति से खिलवाड़ की, यह उसी का परिणाम है ।
देर तूने बहुत कर दी, महादेव भी यह कह गए ।।
केदार में डमरू बजा, ताण्डव शिवा का हो गया ।
तूने जंगल काट डाले, नदी तट भी बह गए ।।
भूला अगर घर लौट आए, इसी में सब का भला ।
चोट खाई है पथिक नादान , प्रभु भी कह गए ।।
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