Nari shakti par kavita/अखिलेश प्रताप सिंह

“भारत की माताएं”

(nari shakti par kavita)


“भारत” – “भारत की माताओं” को, दिल से करूं प्रणाम,

अपने- अपने पूत्रों की खातिर, कर गई अचरज काम ।।

 

लक्ष्मी बाई पुत्र की खातिर, अंग्रेजों से लड़ पड़ी,

बच्चे की रक्षा खातिर, अंग्रेजों पर टूट पड़ी ।।

 

वीरांगना माता , जीजाबाई का याद करो बलिदान,

पुत्र (शिवाजी) को देश की ढाल बना कर, देश पर किया कुर्बान ।।

 

कैकेई ने ममता की खातिर, कितना सुना कुफार,

मांग- सिहासन पुत्र की खातिर, भगवान को वनवास ।।

 

माँ देवकी ने पुत्र की खातिर, गर्भ दे दिया दान,

तब जाकर बलराम को मिला, कंश से जीवन दान ।।

 

देश की रक्षा की खातिर, माँ गंगा ने, किया दुर्लभ काम,

भीष्म पितामह के अग्रजों को, पहुचाया मृत्यु धाम ।।

 

माँ गौरा ने पुत्र के खातिर, महाकाल से किया संग्राम,

प्रथम अग्रणी पूजा हो, गणपति को दिया वरदान ।।

 

“भारत” – “भारत की माताओं” को, दिल से करूं प्रणाम,

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अखिलेश प्रताप सिंह (रवि)


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