bhool sakate hain kaise tujhe zindagi /ममता सिंह

bhool sakate hain kaise tujhe zindagi : ममता सिंह की रचना भूल सकते हैं कैसे तुझे जिंदगी जो एक ग़ज़ल है जहाँ पर प्रेम के मनोभावों को प्रदर्शित किया गया हमें आशा है कि इस ग़ज़ल को पढ़कर पाठक एक बार तो इसको गुनगुनायेंगे प्रस्तुत रचना प्रेम को नए तरीके से प्रदर्शित करती है। 

भूल सकते हैं कैसे तुझे जिंदगी


भूल सकते हैं कैसे तुझे जिंदगी
दर्द ही जब वजह बन गयी प्यार की॥
अब न मेरी वफ़ाओं पे इल्जाम दो.
कर दी कुर्बान अपनी सारी खुशी.
सोचती हुँ ये कैसे कटेगा सफर.
एक दिन जान लेगी तेरी बेरुखी.
उम्र भर साथ दूं था ये कहना तेरा.
क्या यही चार दिन की तेरी दिल्लगी.
खामियां ढूँढोगे तन्हा रह जाओगे.
इश्क़ का दूसरा नाम है बस यकीं.
दूरियाँ इस कदर बढ़ गयी मन में यूँ.
जितनी ही दूर है आसमां से जमीं.
‘ममता’ दिल में इबादत ऐसे करुं.
जैसे करता हो रब से कोई बंदगी.
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ममता सिंह

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