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Awadhi- poetry- Gram- pradhan- chunav

Awadhi poetry on Gram pradhan chunav

सजन, अबकी हमहूँ  लड़ब परधानी।

(Awadhi poetry on Gram pradhan chunav)


मिला नाहीं सुखु बीती आधी जिन्दगानी

सजन,     अबकी   हमहूँ  लड़ब परधानी।

 

आजुइ अखबारन मइहाँ है समाचार यहु आवा।
हमका आजु सबेरेन आ लोखई का पूतु बतावा।
अबकी महिला सीट हवै हे साजन अपने गाँव मा।
हमहूँ का लड़वाय दियौ हम परित तुम्हरे पाँव मा।
मानि   जाव  बतिया, करौ   ना   मनमानी।
सजन,   अबकी    हमहूँ     लड़ब    परधानी।

 

भोलई की अम्मा बोली हैं वोट हम तुमका द्याबै।
रमकाला सुखकाला बोली इज्जतिघरु हम ल्याबै।
सुक्खू के बप्पा बोलि गयें हैं हमका चही कलोनी।
पूरे घरउना की सारी वोटै तुमका द्याब  सलोनी।
मनई – मेहररुवै   सब   हम   पर    दिवानी।
सजन,   अबकी   हमहूँ    लड़ब    परधानी।

 

चिंता करौ न बालम तनिकौ जबै वौट हम मागब।
ऐसा करब सिंगार कि जइसे सुघर अप्सरा लागब।
गँउना के मनसेधू हमरी यक मुस्की मा रिझिहैं।
डाँगर सबै खड़े होइ जइहैं नाटा घूरु का बेझिहैं।
कहिनि नहोरे तूमका  द्याबै निसानी।
सजन,   अबकी   हमहूँ   लड़ब   परधानी।

 

सौ पेटी लै आयौ बलमुआ तुम दारू के पउवा।
चालिस पेटी इंग्लिस वाली बूढ़ि पुरनिया दउवा।
पंसउवा नोटन की गड्डी दस ठइयाँ लइ आयौ।
राज श्री कमला पसंद की पुड़िया खुब बंटवायौ।
नहीं   काम   बनतै   अब   खाली   जुबानी।
सजन,   अबकी   हमहूँ   लड़ब   परधानी।

 

जेतने गाँव म बुढ़वा बुढ़िया पेंसन सबै देवइबै।
सबै मिली कोटा का रासन लाल कार्ड बनवइबै।
खर्च करब पइसा तो हर काम का पइसा ल्याबै।
बिन पइसा के कोहू का हम हाथ धरै नहिं द्याबै।
हँसी खुसी आपनि कटी जिन्दगानी।
सजन, अबकी हमहूँ लड़ब परधानी।

 

नाहीं नूहीं करौ न बालम नाहीं नाक सिक्वारौ।
नहर किनारे वाले सारे ख्यात बेंचि तुम डारौ।
रुपिया पइसा सबते ज्यादा यहिमा दियौ लुटाई।
कुछै दिना कै बात है बालम काटौ सकल मिठाई।
सयझि जाव परधानी जीती जितानी।
सजन, अबकी हमहूँ लड़ब परधानी।

 

ह्वाबै जो पर्धान तो तूमका सब पर्धानपति कहिहैं।
गाँव जेतने ठेलुहा हैं सब आगेन पीछे रहिहैं।
चाहै जेतना ख्यात खरीदौ पक्का घरु बनवावौ।
एतना मिली रुपइया कि खूब मस्ती मउज मनावौ।
चहै जेतना कीन्हेउ फिरि तबै मनमानी।
सजन, अबकी हमहूँ लड़ब परधानी।

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      इन्द्रेश भदौरिया रायबरेली

आपको Awadhi poetry on Gram pradhan chunav। ग्राम प्रधान चुनाव पर अवधी कविता /इन्द्रेश भदौरिया रायबरेली की रचना कैसी लगी अपने सुझाव कमेंट बॉक्स में अवश्य बतायें। 

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