वसुधैव कुटुंबकम् / हूबनाथ

वसुधैव कुटुंबकम् / हूबनाथ हमारी बस्तियाँभले पक्की हो गई हैं घरों में बन गएशौचालयतुम्हारे घरों की तरह हमारे कपड़ेतुम्हारी तरह साफ़सुथरे हो गए हमें भी मिलने लगीदो वक़्त की रोटीभरपेट … Read More

परख / सम्पूर्णानन्द मिश्र

परख किस पायदानपर खड़े हैंमूल्यांकन हो इसकाक्योंकि फूलों कापायदानपहुंचा तो सकता है शीर्ष परलेकिन टिका नहीं सकतादेर तक हमें वहांहो सकता हैख़तरनाकएवं जानलेवाजिस पायदान परमुसीबतों का शूल होरखो धीरे- धीरे … Read More

विमुख / सम्पूर्णानंद मिश्र

विमुख / सम्पूर्णानंद मिश्र सत्य से विमुख व्यक्तिफोटो की तरफ़ भागता हैक्योंकिभीतर अपने अमा लेता हैफोटोपेट के पाप कोऔरनिष्पाप चेहरादिखाता है समाज कोवैसे आजकलएक चेहरे सेजीवन जीनापानी पर लकीरें खींचना … Read More

पत्र की व्यथा/ सम्पूर्णानंद मिश्र

पत्र की व्यथा/ सम्पूर्णानंद मिश्र पत्र अपनी व्यथासुना रहा थाअतीत के सुखद दिनकी गाथा गा रहा थालोग दिल की बात पत्रपर लिख जाते थेप्यार की बातें कह जाते थेमहीनों पोस्टआफिसके … Read More

मृत्यु के बाद / सम्पूर्णानंद मिश्र

मृत्यु के बाद / सम्पूर्णानंद मिश्र लेकर जाती हैऔरत अपनी मृत्यु के बादघर की समृद्धिबच्चों का बचपनबेटियों का अल्हड़पनघर की दीवारों‌ की मुस्कुराहटचौखट की गोपनीयताखिड़कियों की रौशनीचूल्हे- चौकों की मर्यादाआंगन … Read More

फ्रैक्चर / सम्पूर्णानंद मिश्र

फ्रैक्चर / सम्पूर्णानंद मिश्र जब विश्वास का पैरफ्रैक्चर होता हैतो नहीं ठीक होता है जल्दीबहुत समय लगता हैइसको फिर से खड़ा होने मेंक्योंकिजब यह खड़ा होता हैधीमी चालचलता हैतोअविश्वास के … Read More

मत ढूंढ़ों मुझे / सम्पूर्णानंद मिश्र | Sampurnanand Mishra Poems in Hindi

मत ढूंढ़ों मुझे / सम्पूर्णानंद मिश्र नहीं हूं वहां मैंजहां ढूंढ़ा जा रहा है मुझेथा कभी वहां मैंउस दालान मेंबूढ़े बाबा के पासजहां इंसान पनही से नहींअपने आचरण से जोखा … Read More

सुखद दिन / डॉ०सम्पूर्णानंद मिश्र

सुखद दिन / डॉ०सम्पूर्णानंद मिश्र वे दिन कितने ‌सुखद थेस्वच्छता अभियान परन खर्चा न‌ चर्चाविद्यालय ‌पहुंचने परसाफ-सफाई करके‌जमीन परबोरी‌ बिछाते थेगुरुकुल परंपरा मेंपढ़ने बैठ जाते थेगुरु का आदेश शिरोधार्य थापूरी … Read More

बंद है बात / सम्पूर्णानंद मिश्र

बंद है बात / सम्पूर्णानंद मिश्र कई वर्षों सेबंद है बातधरती और आकाश कीदोनों तने हैंखंज़र दोनों केख़ून से सने हैंनहीं झुकना चाहता हैमुट्ठी भर कोई भीस्वीकार नहीं हैअपनी लघुता … Read More

पिता की नसीहत / सम्पूर्णानंद मिश्र

पिता की नसीहत / सम्पूर्णानंद मिश्र पिता ने ‌पुत्र को‌नसीहत देते हुएकहा कि बेटाजिंदगी में पानी की तरहमत बहनासपाट‌ जीवन मत जीनारुकावटें आएंगीतुम्हें विचलित करजायेंगीतोड़ने ‌का प्रयास ‌किया जायेगाटूटना ‌मतबिकना … Read More

प्रदर्शन | सम्पूर्णानंद मिश्र

प्रदर्शन / सम्पूर्णानंद मिश्र और तौर-तरीके हैंप्रदर्शन केआगज़नी, तोड़फोड़, लूटपाटहल नहीं हैबहुत बड़ा अपराध हैक्षतिग्रस्त करनाइस तरह से देश कोलहू पीकर भाइयोंका अपने हीकभी नहीं प्रसन्न रह सकतेसमृद्धि की यह … Read More

झूठ के पनारों में / सम्पूर्णानंद मिश्र

झूठ के पनारों में / सम्पूर्णानंद मिश्र घटनाएं घटती हैंसृष्टि मेंऔर रोज़ घटती हैंकभी अच्छीतो कभी बुरीकुछ घटनाओं कोनिगल जाता है पेट मेंइतिहासऔर कुछ उगील देता हैजो उगीलता हैवह तथ्यपाठ्यक्रम … Read More

आ जाओ गौरैया | डॉ सम्पूर्णानंद मिश्र

आ जाओ गौरैया | डॉ सम्पूर्णानंद मिश्र आ जाओ गौरैया आ जाओ गौरैया रानीफुदकती हुई मेरे छत परचीं चीं चूं चूं का स्वरमेरे सहन में बिखरा जाओतुम कैसी हो ?कहां … Read More

इन्हीं आंखों ने देखा है | डॉ० सम्पूर्णानंद मिश्र

इन्हीं आंखों ने देखा है | डॉ० सम्पूर्णानंद मिश्र शिष्टजनक्याइन्हीं आंखों ने देखा है ?सारा मंज़रअपना छिनता हुआ बचपन‌‌ हां भाई देखा है‌‌ इन्हीं आंखों ने!‌ बाजार के गोलगप्पे जहां … Read More

बोलो कबीर / डॉ. सम्पूर्णानंद मिश्र

बोलो कबीर आशंका अविश्वासनकारात्मक सोचकी कुक्षि सेअहंकार और ईर्ष्या का उदय होता हैजिसका पथ जाता हैसीधे विनाश के गड्ढे मेंमाने बैठें हैं सत्य इसी कोकुछ तथाकथितजो छल, पाखंड, ढोंग और … Read More