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hindi kavita Archives - HindiRachnakar

hindi kavita रखती है आबरू/ सम्पूर्णानंद मिश्र

hindi kavita रखती है आबरू रखती है आबरू गुज़र रहे हैं माना कि बहुत बुरे दौर से हम सब लेकिन न उखड़े विवेक और धैर्य का खूंटा भलाई है पूरे … Read More

ghar aur makaan hindi kavita /सीताराम चौहान पथिक

घर और मकान  (ghar aur makaan hindi kavita) घर मकान कब बन गया , भनक   पड़ी नहिं कान । चूना   पत्थर ईंट मिलि , चुरा    ले    गए   शान … Read More

saty kee jeet hindi kavita/डॉ० सम्पूर्णानंद मिश्र

सत्य की जीत (saty kee jeet hindi kavita) अंधकार के गर्भ से जन्मता है प्रकाश जन्मता है सत्य भी वैसे ही झूठ के गर्भ से चाहे जितनी कोशिश की जाय … Read More

Hindi poem on childhood-बचपन/सीताराम चौहान पथिक

Hindi poem on childhood:  हिंदी  साहित्य  के वरिष्ठ  साहित्यकार  सीताराम  चौहान  पथिक  की  रचना  बचपन  पाठको  के  सामने  प्रस्तुत  हैं  बचपन  बच्चों में मैं बच्चा बन कर , बचपन को  … Read More

Bachpan par hindi kavita- कोई लौटा दे मेरा बचपन/ कल्पना अवस्थी

Bachpan par hindi kavita   कोई लौटा दे मेरा बचपन  हर तरफ फैला बस खुशियों का तराना था  सबसे प्यारा वह बचपन का जमाना था । मां की गोद थी, … Read More

Nafrat ki aag-नफ़रत की आग/संपूर्णानंद मिश्र

Nafrat ki aag  नफ़रत की आग   नफ़रत की आग   लिए क्यों बैठे हो  आपदा में भी  इतने क्यों ऐंठे हो   सीने में खंज़र  भोंकने की ख्वाहिशें  अब भी पाले … Read More

thithur gaya sooraj-ठिठुर गया सूरज/सम्पूर्णानंद मिश्र

thithur gaya sooraj  ठिठुर गया सूरज       ठिठुर गया शीतलहर से सूरज भी तल्ख हो गया मौसम का रुख़ और भी ठंडी हवाओं के बीच कोहरे की चादर … Read More

Prem path hindi poem for love-प्रेम पथ/अरविंद जायसवाल

Prem path hindi poem for love  प्रेम  पथ बहुत दूर जाके भी मुड के न देखा,  मैं उनके ही सपने सजाती रही हूँ,  उन्होंने तो जी भर के की बेवफाई, … Read More

Visthaapan ek traasadee-विस्थापन एक त्रासदी/सम्पूर्णानंद मिश्र

Visthaapan ek traasadee विस्थापन एक त्रासदी   ———————————– *चीखें, चिल्लाहटें    करुण क्रंदन जैसे जायज़ शब्दों से   निकले स्वर भी इक्कीसवीं सदी की सड़क पर    प्रजनन स्त्रियों की … Read More

Poem on corona-इस कोरोना काल में

Poem on corona इस कोरोना काल में दर्द हमारा सूना निकला, इस कोरोना काल में। रिश्ते नाते दूर हो गए,इस कोरोना काल में।   तिमारदार अब दूर ,हो गए इस … Read More

poem on Environmental awareness/ पर्यावरण -चेतना

 poem on Environmental awareness   पर्यावरण –चेतना ।   गंगा पुकारती रही , यमुना कराहती रही । दूषित ना तुम करो हमें , मैया  पुकारती  रही  ।   हम कैसे  … Read More

कविता पर एक कविता -डॉ० सम्पूर्णानंद मिश्र/kavita par ek kavita

कविता पर एक कविता कविता जब से तुम मेरे जीवन में आई हो मुझे बहुत भाई हो  पूरी तरह से  मेरे ऊपर छाई हो तुम्हारे रंग- रूप पर मैं मोहित हूं काव्य-उदधि पार कराने हेतु तुम हमारे लिए बोहित हो तुम्हारे काव्य लावण्य के लिए बहुत बेचैन रहता हूं न रात में सो पाता हूं न दिन में कोई काम कर ‌पाता हूं क्या सचमुच में  तुम्हारा मुझसे लगाव है या यूं ही मेरा तुम्हारे ऊपर झुकाव है बात चाहे जो हो कविता तुम चाहे जो हो तुमसे मेरी पत्नी नाराज़ हैं जबकि हमारे तुम्हारे रिश्ते में ना राज है ना साज है ! तुम मेरी  आत्मा में बसती हो खिलकर हंसती हो मुझे ही रचती हो … Read More

corona jagrukta par kavita- कोरोना – संकट

corona jagrukta par kavita कोरोना-संकट  कीटाणु- बम विस्फोट हुआ कोरोना विषाणु का जन्म हुआ । संक्रामक  और दुष्ट कीट ने , जग के कोने- कोने को छुआ। अखिल विश्व में … Read More

Mera astitva-मेरा अस्तित्व/कल्पना अवस्थी

Mera astitva मेरा अस्तित्व इक छोटी सी हार से,   कभी रुकना मत जो गलत हो उसके समक्ष कभी झुकना मत लोगों का क्या है पल में अपनी सोच बदल लेते … Read More

jhuka hua dhvaj kavita-झुका हुआ ध्वज/सम्पूर्णानंद मिश्र

jhuka hua dhvaj kavita-झुका हुआ ध्वज/सम्पूर्णानंद मिश्र झुका हुआ ध्वज रामनाथ तुम क्यों लड़खड़ा रहे हो‌ ? तुम्हारे ओंठ क्यों फड़फड़ा रहे हैं क्या बात है तुम्हारे चेहरे का ध्वज क्यों झुका ‌हुआ है पूरा देश नववर्ष का जश्न मनाने जा रहा है तुम्हारी चाल में फिर इतनी सुस्ती ‌क्यों है रामनाथ ने कहा साहब ! हम लोगों के लिए नववर्ष का कोई अर्थ नहीं है‌ मुझ जैसे गरीबों के लिए सब व्यर्थ है रोज़ कुंआ खोद कर पानी पीना‌ है … Read More

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