फागुनी रंग में रंगा प्रेरणा का एक होली गीत | नरेंद्र सिंह बघेल

फागुनी रंग में रंगा प्रेरणा का एक होली गीत ।!!!!!!!!! रंग लगाएं होली में !!!!!!!!!आओ हम सब मिलजुल कर ,त्यौहार मनाएं होली में ।प्रेम-स्नेह औ मर्यादा के ,रंग लगाएं होली … Read More

‘इस बार फागुन में’ | रश्मि ‘लहर’

‘इस बार फागुन में’ खिला टेसू, पलक भीगी ,सखी! इस बार कानन में।चुनरिया भी बुलाती है;मिलो इस बार फागुन में।। हुए किसलय ये प्यासे हैं,कपोलों को तनिक देखो!कली गाने लगी … Read More

वसंत गीत | गीतकार दुर्गा शंकर वर्मा ‘दुर्गेश’

फिर से अब नव बसंत आया,आया तो सबके मन को भाया।पीत फूल सरसों के फूल गए,उन पर आकर भंवरे भी झूल गए।महक उठी फूलों की क्यारियां,भंवरे अपने घर की राह … Read More

साथ कुछ पल | शैलेन्द्र कुमार

प्रीति भरी बातों के कुछ पलप्रतीक्षारत मुलाकातों के कुछ पलभंगिमाओं के, भावों के कुछ पलरिक्तता के, आभावों के कुछ पलअधिकार भरे मानों के कुछ पलस्वप्न भरे अरमानों के कुछ पलतुम्हारे … Read More

जाग्रत कवि संपूर्णानंद! हूबनाथ पांडेय

कवि अपने समय का सजग प्रहरी होता है। वह अपने समय और समाज की प्रत्येक गतिविधि पर पैनी नज़र रखता है और समाज के सार्थक विकास में आनेवाली अड़चनों – … Read More

बाल कविता | आओ चीकू,आओ पीहू मिलकर मकरसक्रांति मनाएं | प्रतिभा इन्दु

बाल कविता आओ चीकू,आओ पीहू ,मिलकर मकरसक्रांति मनाएं।आओ बेबू ,आओ कुहू,रंग बिरंगी पतंग उड़ाएं। ले धरती से नभ तक पहुँची ,नाप रही वो अम्बर का छोर।खुश होकर ,गुनगुन ! बोली,भइया … Read More

किसान शहीद दिवस पर कविता | दुर्गा शंकर वर्मा ‘दुर्गेश’

किसान शहीद दिवस पर | दुर्गा शंकर वर्मा ‘दुर्गेश’ मातृभूमि के लिए लड़े,और लिख दी नई कहानी।जिनके लहू से लाल हुआ था,सई नदी का पानी।दन-दन-दन-दन गोली चलती,आगे बढ़ते जाते।इंकलाब का … Read More

” एक बार फिर आओ राम” | आवाहन गीत | राजेन्द्र वर्मा “राज”

हे !इस जग के तारणहार, जन- जन का है तुम्हें प्रणाम।आकर पावन करो धरा को ,आलोकित कर दो हर धाम।।एक बार फिर आओ राम । राह तुम्हारी देख रही हैं … Read More

आ रहे राम। हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश

आ रहे राम। हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश आ रहे राम,इतिहास नया फिर गढ़ने को,दुष्ट दानवों को पछाड़ आगे बढ़ने को।टेक। चर-अचर प्रफुल्लित लगते हैं,मधु वारिद नेह बरसते हैं।सोंधी गन्ध महकता मरुथल,गिरि-निर्जन … Read More

Ram par kavita lyrics | Ram par geet | Ram ki Vedana

राम की वेदना | Ram ki Vedana अश्रु झरे थे अवध नगर के महलों और गलियारों सेछोड़ चले सब धरम धुरंधर,आंगन और चौबारों से।**राजमहल में सोने वाले,राजकुंवर के कोमल तन,उधर … Read More

स्वागत | सम्पूर्णानंद मिश्र

स्वागत | सम्पूर्णानंद मिश्र पूरा देशखड़ा हैनववर्ष के स्वागत में दरअसलअतीत के घावजो हमारी देह पर थे कुछ सूख चुके हैंकुछ सूख रहे हैंऐसे मेंकड़वी स्मृतियों के कांटेंउस घाव कोफिर … Read More

नया साल आ रहा है | सम्पूर्णानंद मिश्र | Naye Saal Par Kavita 2023

नया साल आ रहा है | सम्पूर्णानंद मिश्र | Naye Saal Par Kavita 2023 अपनी आत्मा परकितनी नृशंसघटनाओं का बोझलादेदिसंबर माह जा रहा है लूट-पाट,हत्या, बलात्कारजैसेजघन्य पाप का साक्षीभले ही … Read More

सियासत में कयादत बोलती है | आशा शैली

सियासत में कयादत बोलती है | आशा शैली सियासत में कयादत बोलती हैमगर सिर चढ़के दौलत बोलती है जवां कुर्बान होते हैं वतन परकि सीमाओं पे हिम्मत बोलती है अदब … Read More

कितनी बार टूटता है | सम्पूर्णानंद मिश्र

कितनी बार टूटता है | सम्पूर्णानंद मिश्र बूढ़ेमां -बाप की‌ रोशनी होती हैंउनकी संतानें पूरी ज़िंदगीअपनी आंखोंकी रोशनी बेचकर संतानों कीख़्वाहिशों के आंगनमें उनके सपनों काजो पूर्ण चांद खिलाता हैवह … Read More

वह मात्र एक छलावा है | सम्पूर्णानंद मिश्र

वह मात्र एक छलावा है वैसे तोसुख की कोईपरिभाषा निश्चित नहीं है लेकिनअच्छी अनुभूति सुख का आधार हैऔर बुरी दु:ख का महात्मा बुद्ध ने कहाजीवन में दुःख ही दु:ख हैऔर … Read More