सुर्खुरूॅ होने में, वक्त लगता है | सजल | हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘ हरीश’

सुर्खुरूॅ होने में, वक्त लगता है | सजल | हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘ हरीश’ सुर्खुरूॅ होने में, वक्त लगता है। सिलसिला यादों का ,चलने दीजिए,ख्वाब सा ख्यालों में, रहने दीजिए।1। मैं … Read More

जागरण गीत | सजल | हरिश्चन्द्र त्रिपाठी’हरीश’

जागरण गीत अब तो तू उठ जाग,भला क्यों सोया है ,चिन्तन कर सौ बार,कहॉ क्या खोया है।टेक। कण-कण रक्त सनी यह धरती,गुम सुम गंगा – जमुना बहती ।तरु-तर में आक्रोश … Read More

तेरी सुधि की अमराई से | हिंदी कविता | हरिश्चन्द्र त्रिपाठी’ हरीश

तेरी सुधि की अमराई से | हिंदी कविता | हरिश्चन्द्र त्रिपाठी’ हरीश तेरी सुधि की अमराई से तेरी सुधि की अमराई से,मलय सुरभि ले आता है।मेरी उखड़ी सॉसों को प्रिय,सन्देश … Read More

चलो गगन में तितली बनकर । Hindi Poem for Kids

चलो गगन में तितली बनकर । Hindi Poem for Kids चलो गगन में तितली बनकर,दूर घूम कर आयें हम ।देखें कितनी सुन्दर दुनिया,शाम ढ़ले घर आयें हम।टेक। बड़ा अजूबा लगता … Read More

रचनाकार हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’ की हिंदी कविताएं

रचनाकार हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’ की हिंदी कविताएं बाल आवाहन १. आओ हम संकल्प नया लें ले लो दीप दिवाली आई,होंठों पर फिर लाली छाई ।1। नूतन का हम स्वागत करते,उपवन … Read More

दे दे रे करवा मॉ वर दे | हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश

दे दे रे करवा मॉ वर दे | हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश‘ दे दे रे करवा मॉ वर दे,अमर सुहाग रहे सबका ।स्नेह -सिन्धु में गोता खायें,मस्त मुदित हो हर तबका … Read More

मानव धर्म अटल हो जाये / हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’

मानव धर्म अटल हो जाये / हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’ रख दो पावन पद रज मस्तक,जीवन धन्य सफल हो जाये।दिव्य-दृष्टि से देखो माते ,पातक उर निर्मल हो जाये।टेक। भव सागर पार … Read More

दे दे रे मॉ,इतना वर दे / हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’

दे दे रे मॉ,इतना वर दे दे दे रे मॉ , इतना वर दे,देश मेरा खुशहाल रहे।हर हाथों को ,काम सौंप दे,हर घर मालामाल रहे । ना जानूॅ मैं पूजन … Read More

 जय-जय मदन गोपाल की / हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’

जय-जय मदन गोपाल की / हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर , ढेरों शुभ कामनाओं के साथ सादर,  हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’ की रचना पाठको के सामने प्रस्तुत … Read More

पोषक रक्षाबंधन है /हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’

पोषक रक्षाबंधन है /हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’ पोषक रक्षाबंधन है भाई-बहन के अमर प्रेम का, पोषक रक्षाबंधन है , धन्य देश की पावन माटी, कण-कण जिसका चन्दन है।। रेशम के दो … Read More

अन्तर्स्वप्न | ‘फुलवारी’ पर एक बाल गीत / हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’

अन्तर्स्वप्न | ‘फुलवारी’ पर एक बाल गीत / हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’ अन्तर्स्वप्न सुनहरी भोर की बेला , धरा का रूप अलबेला। लगे हैं पंख सपनों को सुहाना स्नेह का मेला … Read More

भज ले तू श्री राम / हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’

भज ले तू श्री राम / हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’ रचना हिंदी रचनाकार पाठको के समक्ष प्रस्तुत है , रचना में लेखक का सन्देश है जब मनुष्य को जन्म प्राप्त हुआ … Read More

बहती जैसे गंग-धार हो/हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’

बहती जैसे गंग-धार हो/हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’ बहती जैसे गंग-धार हो। मॉ तू पावन निर्मल कल-कल, बहती जैसे गंग-धार हो। सर्वश्रेष्ठ कृति ,सृष्टि धरोहर, उर-उपवन की मधु बहार हो। उच्छ्वासों में … Read More

Poem on oxygen crisis – प्राणवायु पर कविता

Poem on oxygen crisis  – प्राणवायु पर कविता  / हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’ प्राणवायु के लिए तड़पती , सहमीं दुनिया सारी है । भरत-भूमि पर अद्भुत संकट , यह अद्भुत महामारी … Read More

Corona Se bachaav par kavita/हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश’

Corona Se bachaav par kavita कोरोना से  बचाव पर कविता  मास्क लगाकर,दूरी रखिये , चाहो यदि निज खैर । अनदेखी न करना मेरा – नहीं किसी से बैर ।।1।। स्वस्थ … Read More