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बाबा कल्पनेश Archives - HindiRachnakar

बाबा कल्पनेश की छंद रचनाएँ | Pushp Aur kantak

बाबा कल्पनेश की छंद रचनाएँ | Pushp Aur kantak पुष्प और कंटक   छंद-दुर्मिल यह कैसा संकट,पथ के कंटक,फिर-फिर शीश उठाते हैं। ये डाली-डाली,हे उर माली,देखे पुष्प लुभाते हैं।। जो … Read More

तुलसीदास / बाबा कल्पनेश

तुलसीदास / बाबा कल्पनेश तुलसीदास विधा-मात्रिक सवैया(वीर छंद)16,15 राम चरित मानस की रचना,रच के तुलसीदास महान। अमर हो गये इस धरती पर,मानवता का कर कल्यान।। शिशुता बीती बहुत कठिन पर,जिस … Read More

महाभुजंगप्रयात | मत्तगयंद / बाबा कल्पनेश

महाभुजंगप्रयात विधान-24 वर्ण,8 यगण,12,12 वर्णों पर यति मापनी-122×8 हिलाया-डुलाया कहाँ डोलता है, लगे ज्यों मरा हो कहाँ बोलता है। बुरा आप मानें भला आप मानें, नहीं ये कभी भी सही … Read More

बृजेंद्र गति छंद | प्रभु राम – बाबा कल्पनेश

बृजेंद्र गति छंद | प्रभु राम – बाबा कल्पनेश बृजेंद्र गति छंद पाथेय से हर रोग टूटे खोना नहीं,तुम धैर्य साथी,साधना करना। पाथेय से,हर रोग टूटे,मत कभी डरना।। उस ईश … Read More

बुड्ढा जब बोला करता | शारद वंदन – बाबा कल्पनेश

बुड्ढा जब बोला करता | शारद वंदन – बाबा कल्पनेश बुड्ढा जब बोला करता वह बुड्ढा जब बोला करता,पीर छलक जाती थी। उसके बानी की प्रियता तो,मुझको अति भाती थी।। … Read More

Kundaliya chhand |  मानव | बाबा कल्पनेश

Kundaliya chhand |  मानव | बाबा कल्पनेश विधा-कुण्डलिया छंद मानव  पढ़ना मानव का चरित,कहना तभी महान। संत-शास्त्र सबने किया,जिसका बड़ा बखान।। जिसका बड़ा बखान,स्वयं मानव है करता। जड़-चेतन जग जीव,प्राण सब … Read More

Ram Ke Vansh | राम के वंश / बाबा कल्पनेश

Ram Ke Vansh – राम के वंश / बाबा कल्पनेश राम के वंश विधा-श्रृंगार छंद विधान-आदि त्रिकल-द्विकल अंत-त्रिकल-द्विकल।दो-दो चरण समतुकांत करो तुम निज कुल का अब शोध। मार्ग से हटे … Read More

Ghanaaksharee – घनाक्षरी / बाबा कल्पनेश

Ghanaaksharee – घनाक्षरी / बाबा कल्पनेश घनाक्षरी तिमिर के रिपु अभी उदित हुए ही नहीं। यहाँ-वहाँ-कहाँ गया तम जो घना रहा।। आस-पास कूक कूक कोयल है कुहू करे। खोजिए तो … Read More

chhand-panchchamar | छंद-पंचचामर- बाबा कल्पनेश

chhand-panchchamar १. छंद-पंचचामर रमानिवास जागिए,मही तुम्हें पुकारती। प्रभात हो सके धरा,सुहाग माँग धारती।। तुम्ही विभात प्राण हो,प्रकाश पंथ खोल दो। विषाणु नष्ट हो सके,हवा सुमिष्टि घोल दो।। जवान भी किसान … Read More

सरसी छंद | आओ ऐसी बात करें हम | हिन्दी कविता

सरसी छंद | आओ ऐसी बात करें हम | हिन्दी कविता आओ ऐसी बात करें हम मापनी-सरसी छंद। 16,11 आओ ऐसी बात करें हम,सुने न कोई कान। पर दर्शन में … Read More

रोग बड़ा कोरोना आया / बाबा कल्पनेश

आज हम  बाबा कल्पनेश की दो   रचना  पढ़ेंगे रोग बड़ा कोरोना आया  और गीत श्रृंगार, हमे आशा है कि प्रस्तुत रचनाएं आपको नया सन्देश देंगी।  रोग बड़ा कोरोना आया रोग … Read More

छवि निहारूँ पावनी / बाबा कल्पनेश

छवि निहारूँ पावनी  छवि निहारूँ पावनी प्रभु आप आएँ इस हृदय में,छवि निहारूँ पावनी। सिय मातु संग में लखन दिनकर,हो विभा मन भावनी।। उर घन तिमिर डेरा हटे प्रभु,अब कृपा … Read More

Poem on Ram in Hindi – सीयराम नाम दें

Poem on Ram in Hindi छंद-चामर सीयराम नाम दें राम-राम राम-राम राम-राम राम हो। राम-राम राम-राम अंजनी लला कहो।। राम-राम राम-राम कल्पनेश बोल रे। राम-राम नाम का सुदिव्य घोल-घोल रे।। … Read More

Hindi Kavita Prabhu Ram / बाबा कल्पनेश

Hindi Kavita Prabhu Ram छंद-तोटक प्रभु राम प्रभु राम हरो दुख द्वंद सभी। नहिं नाथ रहे दुखियान कभी।। निज भक्ति गुमान भरो हिय में। अनुरक्त न हो लख के तिय … Read More

Chhand Bhujangaprayaat/ बाबा कल्पनेश

Chhand Bhujangaprayaat छंद-भुजंगप्रयात करो मातु दाया न जागे जगाए न बोले बुलाए। नहीं जीव जैसा कभी दीख पाए।। हिलाओ-डुलाओ कभी भी न डोले। पड़ी लाश जैसा नहीं आँख खोले।। बड़ा … Read More

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